हरदा। आपको जानकर हैरानी होगी हरदा जिले के टिमरनी तहसील में एक स्कूल ऐसा भी है जो बार बार स्थान परिवर्तन के लिए मशहूर है। यह स्कूल कभी यहां, कभी वहां, तो कभी अन्य पते पर संचालित होता रहता है। परेशान अभिभावकों जब वह पुराने पते पर पहुंचते हैं तो उन्हें स्थान परिवर्तन के साथ नए पते पर स्कूल संचालित होने की जानकारी मिलती है। इसका लिखित जिक्र शिकायत में भी किया गया है।जानकारी के अनुसार एक शिकायत में बताया है कि टिमरनी नगर में संचालित एक अशासकीय (प्राइवेट, निजी) होली स्टार हाय सेकेंडरी स्कूल शासन द्वारा निर्धारित नियम और गाइडलाइन के अनुरूप संचालित नहीं हो रही है। इसकी
लिखित शिकायती आवेदन जिला शिक्षा अधिकारी को 2 अप्रैल 2025 को की गई है। इसमें आवेदनकर्ता गोविंद सकतपुरिया वर्तमान मुकाम निवासी बारजा तहसील टिमरनी जिला हरदा ने उक्त सभी विभिन्न बिंदुओं पर जांच चाही है। उन्होंने बताया कि यहां 2 हजार या 3 हजार रुपए देकर शिक्षकों की भर्ती कर ली जाती है। कुछ निजी स्कूल संचालकों द्वारा अभिभावकों और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। फीस के नाम मोटी रकम पूरी ली जाती है, परंतु सुविधा अधूरी नजर आती है। स्कूल संचालित होने के लिए शासन द्वारा निर्धारित गाइडलाइन और उनके नियम अनुसार मापदंड में अनियमिताएं हमेशा नजर आती रही हैं। इसी प्रकार कुछ अन्य स्कूल भी आप सभी कि नजर में बने होगे अगर जिनकी भी जांच इन्हीं के साथ निष्पक्ष रूप से हो जाए तो किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि पूर्व में मान्यता देने के दौरान अशासकीय स्कूल की मौका स्थल जांच पर कौन आया था। उक्त सभी बिंदुओं की जांच कर सही का निशान किसने बनाया और किसके द्वारा मान्यता टीप भरी गई। इन पर भी कार्यवाही ठोस रूप से होनी चाहिए प्राइवेट स्कूलों के नियम अनुसार फीस पूरी देने के पश्चात उपभोक्ता यानी अभिभावक और विद्यार्थी को पूरी सुविधा प्राप्त होना का हकदार माना जाता है। उपभोक्ता नियम के अनुरूप भी है जिस पर जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी दरकिनार होते
हुए दूरी साधते हुए नजर आते हैं। वरना कुछ अशासकीय स्कूल नियमानुसार संचालित होना तो दूर प्रतिवर्ष रिन्यू मान्यता भी प्राप्त नहीं हो सकती है। इसका खामियाजा कुछ अशासकीय स्कूल जो सभी नियमों और गाइडलाइन के अनुसार संचालित हो रहे हैं उन पर भी पड़ता है। साथ ही अभिभावक और विद्यार्थी दोनों ही अच्छी शिक्षा और सुविधा से वंचित नज़र जाते हैं
अब देखना यह होगा कि क्या आवेदन के अनुरूप लिखित सभी बिंदुओं पर जिला शिक्षा अधिकारी और उनकी टीम द्वारा इस मामले में कार्यवाही कर गॉज गिराते हैं या अशासकीय स्कूल संचालकों को संरक्षण प्रदान करते हैं l